उद्धरण - 1173

हालिवुडी चलताऊ से लेकर यूरोपीय सिद्धों तक सभी दिग्दर्शकों के यहाँ परम्परा यह है कि इस चमत्कारी चुम्बन के बाद नायिका नायक के प्रशस्त वक्षस्थल में सिर छिपा लेती है और अगर इसी प्रसंग को आगे बढ़ाना हो तो आगामी शाटों मे वह नायक की गोद में सिर रखकर लेटी हुई बालू या पानी पर वही ढाई-पौने तीन आखर लिखती रहती है अपनी अँगुलियों से। वह कुछ ऐसी बेवकूफी की बातें भी करती है जिन्हें सुनकर नायक और दर्शकों के मन में समान रूप से प्यार उमड़ता है।

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