उद्धरण - 797

वह एक विचित्र, पेचीदा और बेमतलब का असत्यवाचन था। ऐसा झूठ जिसे पांड़े सत्य समझ कर बोलता था। ऐसा असत्य जिसके सत्य में पांडे जीता था।

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