उद्धरण - 1172

दुख और सुख का अनुपात घटनाओं से दूरी और निकटता के हिसाब से घटता-बढ़ता रहता है। कुछ दूर निकल आने पर दुखदायी क़िस्से भी मजेदार लगने लगते हैं। कभी-कभी तो जिसकी मृत्यु पर हम आठ-आठ आँसू रोये थे समय बीत जाने पर हँस हँसकर उसके क़िस्से सुनाने लगते हैं।

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