उद्धरण - 1165
आलोचना उनके लिए एक सम्पादक या पत्रिका के लिए लेख लिखना-भर नहीं थी। ऐसा लगता था जैसे वे कुछ व्यक्तियों के सामने नहीं उस इतिहास के सामने बैठे हों। वे उस वक्त अपने दोस्तों-मित्रों या दुश्मनों के नहीं उसके जवाबदेह होते थे। उनके आगे रचनाकार नहीं उसका रचा हुआ साहित्य होता था।
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