उद्धरण - 1150

भिखारी को और किसी की उतनी परवाह ना थी सिर्फ माई के प्रति अपराधी महसूस कर रहे थे। वह माई जिसने धर्म और नैतिकता को छोड़कर कुछ नहीं सिखाया, जिसे अपने बेटे के चरित्र को लेकर हमेशा गुमान रहा करता था, कैसे सह पाई होंगी यह बज्जर की चोट!

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