उद्धरण - 1148

तपस्या भी कैसी महिमाशालिनी होती है क्योंकि इसी तपस्या ने उनकी आकृति को तप्त कांचन के समान निर्मल बनाया है। उस कान्ति से एक अद्भुत शान्ति टपक रही थी।

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