उद्धरण - 1141

जो जितना समृद्ध है वह उतना ही अधिक हिंसक है जो जितना ताक़तवर है उतना ही असहिष्णु है। आप कहोगे कि यह स्नायविक दुर्बलता है पर यह दुर्बलता भी उसी सामाजिक व्यवस्था के कारण पैदा हुई जो शक्ति, समृद्धि और हिंसा की पूजा करती है।

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