उद्धरण - 1140

न गहना न गुरिया बियाह पक्का कर गये ई कागज के टुकड़े से। अपना आप तो सोना और रूपिया और कपड़ा सब लीलै को तैयार और देत के दाँई पेट पिराता है जूता-पिटऊ का। अरे राम चाही तो जमदूत ई लहास की बोटी-बोटी करके रामजी के कुत्तन को खिलइहै।

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