उद्धरण - 1132

उर्दू के एक मशहूर लेखक मुल्ला रमूज़ी ने एक किताब लिखी थी-गुलाबी उर्दू। तो भोपाल की उर्दू गुलाबी उर्दू थीं। कई शब्द भोपाली के अपने थे और उन्हें बोलने के अंदाज़ भी उसके अपने थे। शब्द के बीच में आनेवाले (ह) का यहाँ लोप हो जाता था।

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