उद्धरण - 1130

शहनशाह की तरह देखते हैं सीवन को, नहीं शहनशाह क्या चीज़ है जो कहिए वेदव्यास की तरह। प्रकृति में तीन ही रंग है अभी नीला हरा और सफेद! सब कुछ टटका-टटका सब कुछ चटक-चटक! वर्षा रूपी धोबिन ने प्रकृति की सारी मैल धो डाली है-धोते-धोते ही बुढ़ा गई बेचारी। धोबी घर-घर नरक बिटोरत धोई साफ करि देत। घास बिना फसील सोभित है जिमि किसान के खेत। कोइरी धोवत साग के धोवत तमोली पान जजमनिका पुरोहित धोवत करमकांड के ज्ञान।

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