उद्धरण - 1128
आँख यद्यपि एक ही है पर उसमें एक चिक्कन शलाका द्वारा नित्य अंजन लगाया करते हैं। यद्यपि रात को रतौंधी के कारण देख नहीं सकते परन्तु अप्सराओं के अप्रत्याशित आगमन की आशा से रात भर प्रदीप जलाए रखते हैं। यद्यपि निद्रा में कुम्भकरण के प्रतिद्वन्द्वी हैं पर स्वप्न में नूपुर-क्वणन निरन्तर सुना करते हैं।
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