उद्धरण - 1125

इस प्रसंग में सबसे दर्दनाक घटना थी माँ की जिसे वे सबसे अधिक प्यार करते थे और जो अपने बड़े बेटे पर प्राण निछावर करती थी। उसकी जाँघ की हड्डी टूट गई थी। बुढ़ापे का फ्रैक्चर और वह भी मामूली नहीं। उसे तीन-चार महीने अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। भैया उन दिनों सागर में थे। उन्हें ख़बर दी गई। माँ उन्हें याद कर-करके रोती रहती थी। भैया आए आते ही सामान रखा और उसे देखने के लिए घर से चले। लेकिन गेट तक आकर रूक गए। मेरी ओर देखा और उनकी आँखें छलछला आई- माँ से बोल दो मैं आ गया हूँ। चिन्ता की कोई बात नहीं।

Comments

Popular posts from this blog

उद्धरण - 797

उद्धरण - 549