उद्धरण - 1118
साधारणतः लोग जिस उचित-अनुचित के बँधे रास्ते से सोचते हैं उससे मैं नहीं सोचता। मैं अपनी बुद्धि से अनुचित-उचित की विवेचना करता हूँ। मैं मोह और लोभवश किए गए समस्त कार्यों को अनुचित मानता हूँ परन्तु हमेशा मैं अपने को इन दो रिपुओं से बचा नहीं सका हूँ।
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