उद्धरण - 1114

मानव-जाति दुर्बल नहीं है। अपने विकास-क्रम में वह उन्ही संस्थाओं, रीति -रिवाजों और परम्पराओं को रहने देती है जो उसके अस्तित्व के लिए बहुत आवश्यक होती है। अगर वे आवश्यक न हुई तो मानव उससे छुटकारा माँग लेता है।

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