उद्धरण - 1108

वह कुलभ्रष्टा स्त्री है उसके सद्गुणों का समाज में क्या मूल्य है? दुर्गणों की तो फिर भी कुछ-न-कुछ पूछ है ही। मैंने उसकी कोटरशायिनी आँखों को एक बार फिर देखा।

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