उद्धरण - 1101

शायद सुंदरता वह है जिसके बिछुड़ने पर, जिसके विदा होने पर हमें दुख हो, हम उदास हो जायें। और उसके होने पर हमें सुख हो, हम ख़ुश हो जायें, हमारी आंखें चमकने लगे। अफ़सोस की बात है कि आज बहुत कम चीजे़ ये तासीर पैदा करती हैं। सुंदरता तभी जन्म लेती है जब उसमें इन्सान, पशु, पक्षी किसी का भी जीवन भीतर से ख़ुशी पाये। इसलिए वही ख़ूबसूरत है जो भीतर से भी ख़ूबसूरत है।

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