उद्धरण - 1100
ये रेल का दैत उनहीं का बनावल है, नीचे कोइलौरी से कोइला निकाल लेते हैं ये माटी से लोहा बना लेते हैं। पानी को पेर कर बिजली बनाते हैं और समुन्दर को मथ कर रतन! तेलीफूँन से दूर-दूर तक बात कर लेते हैं। इतने परतापी कि इनके राज में सुरूज तक नहीं डूबता।
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