उद्धरण - 1098

छह वर्ष के कठोर अनुभवों के बल पर मैं कह सकती हूँ कि तुम्हारी जड़ता ही अच्छी थी- मैं अभागिन थी जो तुम्हारा आश्रय छोड़कर चली आई। मेरे जीवन में जो कुछ घटा है उसे जानने की क्या जरूरत है?

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