उद्धरण - 1096

बाबा अपना हुक्का सँभालने लगे। उन्हें माथे पर हाथ धरकर रोने की आदत नहीं। वैसे भी दुख को दुख की मुद्रा में लेकर कभी उन्होंने अपने आपको गम में नहीं डुबोया। हुक्का ताकत की ही नहीं तकलीफों को धुँआ के संग उड़ा देने की निशानी है।

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