उद्धरण - 1095
भैया नियमित शाम को पार्टी ऑफिस जाते। कभी द्विवेदी जी के यहॉं से होते हुए कभी उधर से लौटते द्विवेदी जी के यहाँ जाते। लेकिन मैंने देखा कि उनकी ज़िन्दगी का यह पहला या कहिए शायद अन्तिम भी - वक्त था जब वे पंडित जी के यहाँ जाने से बचना चाहते थे। और जाना काफी कम भी कर दिया था उन्होंने।
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