उद्धरण - 1094

वह यह जानता था कि समाज के सभी स्तम्भों का स्थान अपना अलग होता है। अगर सभी मन्दिर के कंगूरे का फूल बनने की कोशिश करने लगे तो नींव की ईंट और सीढ़ी का पत्थर कौन बनेगा?

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