उद्धरण - 1093
मनोहर देख रहा था उन बोतलों को जो अब नहीं पी जाएँगी, उस सितार को जो अब नहीं बजेगा और संगीतज्ञ पिता को जो अलग-थलग सोया हुआ था। देख रहा था विक्षिप्त उस माँ को जो स्कॉच व्हिस्की की बोतलें एक के बाद एक उँडेल रही थी अर्थी पर लेकिन जान रही थी कि वह जो अपने पर ही सोया हुआ है अब उठेगा नहीं।
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