उद्धरण - 1091
जैसे तुम साथी की भावना में किसी की हिस्सेदारी पसंद नहीं करोगे वैसे ही शरीर में भी। जैसे तुम जिसे प्यार करते हो अपनी आत्मा की हर ख़ूबसूरती- अपनी आत्मा का समूचा अमृत उसे ही देना चाहते हो, वैसे ही शरीर का सारा वैभव, सारा सौन्दर्य उसे ही देना चाहोगे।
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