उद्धरण - 1090

”देखो भिखारी देखते-देखते समय की धारा कैसे बदल जाती है। गंगाजी की पुरनकी धारा में पानी नहीं रहा और यह जो नइकी धारा है यही असिल धारा हो गई। कल को यह धारा भी बदल जाएगी। तुम कहाँ जामे कहाँ जनमे कहाँ पले और आकर कहाँ आबाद हुए।”

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