उद्धरण - 1082

हर आत्मकथा का कुछ हिस्सा या बहुत बड़ा हिस्सा मनगढ़ंत या कल्पित होता है। और हर कथा या उपन्यास का कुछ हिस्सा या बहुत बड़ा हिस्सा आत्मकथात्मक होता है। बहुत कुछ बताने के अभिनय में बहुत कुछ छिपा जाने की चतुराई अंतर्निहित है। दोनों ही माल मिलावटी हैं। सोने में भी मिलावट न करो तो अच्छा गहना नहीं बनता फिर यह तो रचना है।

Comments

Popular posts from this blog

उद्धरण - 797

उद्धरण - 549