उद्धरण - 1078

ऐसा लगता था कि वह पान कम बेच रही थी मुस्कान ज्यादा। मुझे पहचानने की शक्ति का गर्व था। मैं हँसीवाली रूलाई और रूलाईवाली हँसी पहचानने में अपने को सिद्धहस्त समझता था।

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