उद्धरण - 1074
अपने व्यक्तिगत जीवन में डॉ शुक्ला अन्तर्विरोधों के व्यक्ति थे। पार्टियों में मुसलमानों और ईसाइयों के साथ खाने में उन्हें कोई एतराज नहीं था। लेकिन कच्चा खाना वे चौके में आसन पर बैठकर रेशमी धोती पहनकर खाते थे। सरकार को उन्होंने सलाह दी कि साधू और संन्यासियों को जबरदस्ती काम में लगाया जाए और मन्दिरों की जायदादें जब्त कर ली जाएँ लेकिन सुबह घंटे-भर तक पूजा जरूर करते थे।
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