उद्धरण - 1073

उनका कहना था कि जैसे अभी काँख सूँघकर तुममें कुछ ताजगी आई है, वैसे ही वहाँ की गन्ध सूँघकर तुम अपने तमाम बुर्जुआ बासीपन से छुटकारा पा जाओगे। उनका दावा था कि शैलेन्द्र के जो गीत इधर हिट हुए हैं वे खलीक के झोपड़े में चार घंटे बिताने पर मिली प्रेरणा के ही प्रसाद थे।

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