उद्धरण - 1072
जब से छुटि रेल कै गाड़ी कटिगा जंगल पहाड़, पैसा रहा सो गोड़े क सौंपेउँ पेटवा पीठि कै हाड़। (जब से ये रेल चली उसके रास्ते के जंगल और पहाड़ काट डाले गये। पास में से जो पैसा था उसे मैंने पैर को सौंप दिया याने उससे मैंने टिकट खरीद लिया। खाने के लिए पैसा बचा नहीं और पेट पीठ से जा लगा)
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