उद्धरण - 1066
धुन में बँधे आदमी को अपना निर्णय सौ फीसदी सही लगता है। तभी तो उसने आना-जाना कम कर दिया था और सारंग के मन में अपने लिए धिक्कार की भावना पैदा हुई थी- मुझे क्या हो गया है? मैं बदल गई हूँ? वह सारंग कहाँ गई जो गुरुकुल से अनुशासन भंग करने और लड़कियों को सिखाने के जुर्म में निकाली गई थी? गृहस्थ ने कमजोर कर दिया है मुझे जो सुरक्षा पर सुरक्षा ढूँढती हूँ?
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