उद्धरण - 1065

पढ़ने का सुख उसने तब जाना जब उसके बड़े बेटे को वज़ीफा मिला। उसी के पैसों में उसने बकरी खरीदी-अपने बच्चों के दूध पीने के लिए। वह चाहती थी कि उसके बेटे खूब पढ़े-बड़ा आदमी बनें! जिन्होंने उसे देखा था और बातें की थी वे नामवर के नामवर होने का श्रेय माँ को देते हैं। उसने अपने बेटों की पढ़ाई के लिए अपना गहना-गुरिया सारा कुछ बेच डाला था।

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