उद्धरण - 1062

महाराज का जयकारा लगता और फिर जनता लाठी मार-मारकर रावण को ढेर कर देती। बेजान पुतलों को पीटने में सब सूरमा थे। हमारा गुस्सा हमारी खीज इसी तरह अपने रास्ते तलाश लेती। बड़ी लड़ाइयाँ लड़ने की न तो तैयारी थी ना ही माद्दा।

Comments

Popular posts from this blog

उद्धरण - 797

उद्धरण - 549