उद्धरण - 1061

मैं इन्हें सांइस और तरक़्क़ी से जुड़ने के लिए इसलिए उत्साहित करता था कि मेरी निगाह में यही इंसानियत का भविष्य था। यही आदमी के लिए ज़रुरी था लेकिन ये तो ख़ुदग़र्ज़ और जंगली हो गये। जज़्बातों से शून्य हो गये। इन्हें बस पैसा, और अधिक पैसा चाहिए। ख़ुश रहने के लिए नहीं, दूसरों को पीछे छोड़ देने के लिए या दूसरों की भेड़चाल में शामिल हो जाने के लिए पैसा चाहिए।

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