उद्धरण - 1059
वे स्वभाव के अड़ियल थे और इस अड़ियलपने को स्वाभिमान समझने के आदी थे। अपने जिस विवेक पर उन्हें बड़ा भरोसा था वह वास्तव में हर परिस्थिति में अपना हित समझने की चतुरता का ही दूसरा नाम था। उन्होंने विलायत जाकर बैरिस्टरी पढ़ी थी और अंग्रेजों की अनुशासन-प्रियता की कथाएँ या दंतकथाएँ उनके जीवन-दर्शन का मूलाधार थीं।
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