उद्धरण - 1058
स्नेह बड़ी दारूण वस्तु है ममता बड़ी प्रचंड शक्ति है; क्योंकि वृद्ध पिता के थके जीवन में भी एक और उपसर्ग आ जुटा और फिर भी वे अक्लान्त चित्त से मुझे सँभालते रहे। होम-वेदिका से उठकर जब वे अध्यापन के कुशासन पर बैठते तो मेरा धूलि-धूसर कलेवर प्रायः उनकी गोद में होता। मैंने उनसे जितना स्नेह पाया उतनी विद्या नहीं पाई।
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