उद्धरण - 1041
दरअसल मैं एक रोज़ दफ़्तर से लौटते समय वक़्त काटने के लिए एक पत्रिका ख़रीद लाया जिसमें मध्यवर्ग की- भारतीय मध्यवर्ग की- सफलताओं की दास्तान थी और बताया गया था कि इस मध्यवर्ग में बाईस लाख रु की घड़ियां और पच्चीस तीस हज़ार रुपयों के पेन ख़रीदने की ताक़त आ गयी है।
Comments
Post a Comment