उद्धरण - 1037
मनुष्य जिस काम को हृदय से बुरा नहीं समझता उसके कुपरिणाम का भय एक गौरवपूर्ण धैर्य की शरण लिया करता है। मनोहर अब इस विचार से अपने को शान्ति देने लगा मैं बिगड़ जाऊँगा तो बला से पर किसी की धौंस तो सहूँगा नहीं। किसी के सामने सिर तो नीचा नहीं करता।
Comments
Post a Comment