उद्धरण - 1036
सगी बहन भी होती तब भी तुम लापरवाही बरत सकते थे टाल सकते थे कि मेरी कौन सी घरवाली थी? घरवाली हो तब भी आदमी बहाना खोज सकता है कि मरने वाली चली गई केस-मुकदमा करके क्या होगा? गवाह-गिरफ्तारी के चक्कर में कौन फँसे? सजा हो भी जाए तब भी मरने वाला लौटता नहीं। मैं यह जानती हूँ कि औरत के मरने का गम ज्यादा देर भी नहीं मनाते। उम्र भर तो कौन मनाए?
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