उद्धरण - 1034

अब मोहतरमा तारीफ करूँ क्या उसकी ! अल्फाज ओछे पड़ते हैं मेरे। चाँद-सा खोपड़ा है माशाअल्लाह और चुसे हुए आम-से गाल। जिस्म से उसके सींको को रश्क है और कमर को उसकी सिजदे की आदत। पारसी सेठ बताया जाता है कोई। कभी साँझ-ढले अपनी इम्पाला गाड़ी में आपको सैर करा लाता है।

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