उद्धरण - 1026

बेटी की मइया सुख की नींद सोई है कभी? बूढी खेरापतिन इस व्यथा को गीत की लय में ढालने से पहले काँपती आवाज में यह सवाल जरूर पूछती हैं- घर की आबरू धिय-बेटी की देह में धजा की तरह नहीं गड़ी रहती भला?

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