उद्धरण - 1024
दिक्कत यह है कि पढ़-पढ़कर इनके लिए साहित्य क्या ससुरा जीवन तक मौलिक नहीं रह गया। जब देखो गुरू यही कहते हैं कि सन्दर्भ : वह पुस्तक सन्दर्भ : वह नाटक सन्दर्भ : वह फिल्म। गोया किताबें इनके लिए जिन्दगी हो गई हैं और जिन्दगी इनकी ससुरी किताबी हो चली है।
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