उद्धरण - 1022

ज्य़ादा सतर्कता कभी कभी शातिर बना देती है बहक मुक्त करती है। बहक में उजाला है। बहक में रचने का सुख है। बहक में मजा़ ही मज़ा है।

Comments

Popular posts from this blog

उद्धरण - 797

उद्धरण - 549