उद्धरण - 1014

आउट ऑफ कोर्स थ्योरी, हबीब-उल्लाह हास्टन लखनऊ अनवर्स्टी में सन् 1949 में बन्ने मियाँ ने प्रतिपादित की थी। इसमें कहा गया है कि जो ताल्बे-इलम इम्तहाने-जिन्दगी में कोर्स और कोर्स में भी महज इम्पोर्टेंट-इम्पोर्टेंट का घोटा लगाते हैं वही अव्वल दर्जे में पास होते हैं। बन्ने मियाँ ने इस थ्योरी को इश्किया मामलों पर भी लागू किया था और बताया था कि उन्हीं जवाँमर्दों के बिस्तर गरम हो पाते हैं जो सबसे पहले यह देखते हैं कि कौन लुगाई मुकद्दर बनानेवाले ने अपने सिलेबस में रखी है कौन नहीं? आउट ऑफ कोर्स लुगाई को पढ़ने में वक्त जाया होता है, नींद हराम होती है, सेहत खराब होती है, पैसा बरबाद होता है और सारी दौड़-धूप के बाद हाथ वही लगता है, समझें ना।

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