उद्धरण - 1012

आख्यान के सारे ज़रूरी बंधन ढीले हो चुके थे। बंधन ढीले होते ही क़िस्से आवारगी शुरू कर देते हैं। एक हाथ आता है तब तक दूसरा नदारत। मेढकों को तौलने जैसा काम था। क़िस्सों को कतार में खड़ा करना मुमकिन नहीं।

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