उद्धरण - 1010

मर ही जाता तो अच्छा होता। मुक्ति तो मिल जाती! बाप ने कैसे फटाकारा था उसे ! वही बाप जो बिगडै़ल बाभन राजपूतों के आगे कितने नरम सुर में बोलता है उसे काट खाने को दौड़ता है।

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