उद्धरण - 1008

बंगाल में दादी के साथ मजाक करने का रिवाज है दीदी इस बात को जानती थीं और कभी-कभी बड़ा करारा मजाक कर बैठती थीं। उन्हें राजगृह में एक सियार मिल गया था जो उन्हें देखकर तीन बार ठिठक-ठिठककर खड़ा हुआ-जैसे कुछ कहना चाहता हो! दीदी का विश्वास था कि वह बुद्धदेव का समसामयिक था और उसी युग की कोई बात कहना चाहता था; क्योंकि दीदी ने स्पष्ट ही उसके चेहरे पर एक निरीह करुण भाव देखा था। आहा उस युग के स्यार भी कैसे करुणावान होते हैं।

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