उद्धरण - 1004
अगर पुराने जमाने की नगर देवता की और ग्राम-देवता की कल्पनाएँ आज भी मान्य होती तो मैं कहता कि इलाहाबाद का नगर देवता जरूर कोई रोमैण्टिक कलाकार है। ऐसा लगता है कि इस शहर की बनावट गठन जिन्दगी और रहन-सहन में कोई बँधे-बँधाये नियम नहीं कहीं कोई कसाव नहीं हर जगह एक स्वच्छन्द खुलाव एक बिखरी हुई-सी अनियमितता।
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