उद्धरण - 998

वे ग़ायब नहीं हुई हैं। चाचा हंसे-“वे अपनी अपनी जगह से धकेल दी गयी हैं। मैं समझ रहा हूं तुम्हारी बात। ये देसी आम, ये बरतन, ढिबरी, लालटेन, ये सिकहर, ये सिल लोढ़ा, ये सब इसी भारत देश में हैं पर अपनी अपनी जगह से धक्का दे दिये गये हैं। ये ऐसे अंधेरे में गिर गये हैं कि तुम लोगों को दिखायी नहीं देते। पर ये हैं।

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