उद्धरण - 996
चाचा कहते- जिस ज्ञान की आंख में आंसू नहीं और माथे पर पसीना नहीं वह ज्ञान नहीं, ज्ञान का मायामृग है।
चाचा की फ़ैमिली को ऐन्जाय, मस्ती, होज्जाय, चक दे सरीखे शब्द और मेरी अपनी लाइफ है, ‘आय डोण्ट केयर‘ जैसे वाक्य बड़े प्रिय थे जबकि इनके उच्चारण को सुन कर चाचा की भृकुटि टेढ़ी हो जाती थी।
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