उद्धरण - 986
“डांस का कोई ‘महाप्रोग्राम‘ आने वाला था, सारा परिवार दादी को बिठा कर इस यक़ीन के साथ वहां था कि आज दादी का मनोरंजन होकर रहेगा। उन्होंने टिप्पणी की : “ ये नाच है कि सरकस हो रहा है।“ फिर बोलीं-“कसरत कर रही है गंड़खुल्ली।“ और-“ हरामी पेल रहा है।“ कह कर वह हंसने लगी जैसे कोई लतीफ़ा सुन लिया हो।
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